ज़िंदगी से चंद ख़ुशियाँ भी उधार लेके देखेंगे
कुछ दिन बग़ैर इसके भी ग़ुज़ार करके देखेंगे
ज़िंदगी कभी ख़ुशी से चाहे देखे ना मुझे
हम ज़िंदगी से बेशुमार प्यार करके देखेंगे
मुमक़िन है, मोहब्बत में दिल का टूटना मगर
आज उनसे इश़्क का इज़हार करके देखेंगे
दिल की बाज़ी फिर से अगर जीतना है तो
इस नामुराद दिल पे इख़्तियार करके देखेंगे
मुमक़िन है जान देके वो हासिल ना हो मगर
ज़िंदगी पे एक बार जाँ निसार करके देखेंगे
अगर जगह ना मिली दुनिया में कहीं भी
दिल के झोपड़े में ही घर बार करके देखेंगे
गर लकीरें खींचने से कोई बात ना बनीं
उनका हाथ थामके ये चमत्कार करके देखेंगे
बहुत दूर तक चलेंगे आज़माइशों पे हम
कहीं दश्तो सहरा कोई गुलज़ार करके देखेंगे
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