Sunday, May 12, 2019

माँ नहीं बदली

बच्चों के लिए जलती वो शमा नहीं बदली
दुनियाँ बदल गई  मगर वो  माँ नहीं बदली

समय के साथ  बच्चे चाहे  कितने बड़े हों
बच्चों के लिए  माँ की कामना नहीं बदली

माँ की अदालत में बस है दिल की गवाही
ख़ताएं हों चाहे जैसी, वो झमा नहीं बदली

जिस नाम से पुकारो, हर नाम में ममता है
मतलब बदल गये वो अनुपमा नहीं बदली

आज भी हर दर्द में  बस माँ ही याद आए
दिल के  इस पुकार की  जुबाँ नहीं बदली

ना जाने कितने घर में  आशियां बना मेरा
पर माँ की नज़र में मेरी जगह नहीं बदली

बच्चों की हर ख़ुशी में ही ख़ुशी मनाये माँ
उसने कभी ख़ुशी की ये वजह नहीं बदली

उमर के  हर पड़ाव पे  औलाद  तो बदली
पर आज भी बच्चे के लिए माँ नहीं बदली

Saturday, May 11, 2019

आजकल

वो भी नये ख़यालों का मारा है आजकल
जो ग़ैर था पहले, वो हमारा है  आजकल

वाॅलेट की वो तस्वीर  अब पुरानी बात है
सरेआम फेसबुक पे  नज़ारा है आजकल

ना ख़त रहे,  ना ख़त का इंतज़ार ही रहा
बस चैट दिलबरों का सहारा है आजकल

सेल्फी में एक चेहरा भी सीधा नहीं दिखे
सब टेढ़ी निगाहों का इशारा है आजकल

ब्रेकअप का जश्न झूमके मनाना है चलन
दिल टूटना यूँ सबको गवारा है आजकल

बस एक ही नज़र से वो नज़र पे चढ़ गये
और दूसरी  नज़र से  उतारा है आजकल

दीवानों का अब चाँद से रिश्ता नहीं कोई
सितारों में  तन्हा ही  बेचारा है आजकल

अब रात झूमती है मयक़दों में सारी रात
दिन भी मस्त सोके  गुजारा है आजकल

यूट्यूब  पर  दो चार  वीडियो  चढ़ाके वो
हर किसी  निगाह का  तारा है आजकल

हर दिन  वो चाहता है  जैसे  वीकएंड हो
संडे हो चार दिन का ये नारा है आजकल

Wednesday, May 8, 2019

चुनाव आए

अच्छा ख़ासा इंसान था मैं भगवान बनाने क्यूँ आए
ना इधर रहा ना उधर हुआ, श्रीमान बनाने क्यूँ आए

जो गिरेबान में अपने ही ना झाँक सके तो फिर मेरा
अपने जितना ही गिरा हुआ  ईमान बनाने क्यूँ आए

पाँच बरस  पहले भी  तुमने हवामहल  बनवाया था
फिर से सरकारी काग़ज़ पर मकान बनाने क्यूँ आए

हमको तो  भूखे रोने की  आदत है  अब जहाँपनाह
लालच  देकर  रोटी  की  मुस्कान  बनाने  क्यूँ  आए

लूट के कौड़ी कौड़ी तुमने जेब तो ख़ाली कर ही दी
फिर हमरी बस्ती में  मँहगी दुकान  बनाने क्यूँ आए

पिछले  वादे  अब तक  पूरे हुए  ना सत्तर  सालों के
फिर से ख़्वाब दिखाकर यूँ अरमान बनाने क्यूँ आए

जब मेरी तक़लीफ़ से तुमको लेना देना कुछ ना था
अब तुम उसी मुसीबत से पहचान बनाने  क्यूँ आए

धूल झोंक कर आँखों में तुम राज करोगे फिर हमपे
अपनी  ताक़त से  हमको  अंजान  बनाने क्यूँ आए

शिकार करे कोई भी  लेकिन बाँट के  खाते हो सारे
फिर हमको ही  लड़ने का  सामान बनाने क्यूँ आए

देशप्रेम का तमगा ख़ुद ही  लगाकर अपने माथे पर
हमको अपने मुल्क में ही  मेहमान बनाने क्यूँ आए

एक साथ मिल-जुलकर हमनें जैसे ही रहना सीखा
वोट की ख़ातिर पंडित  और पठान बनाने क्यूँ आए

हमको ही भड़का कर हमको हमसे ही कटवाते हो
तुम हर गली-गली को  कब्रिस्तान  बनाने क्यूँ आए

वोट हमारा  हक़ है, कोई भीख नहीं  जो दें  तुमको
हाथ जोड़कर  तुम इसको  वरदान बनाने क्यूँ आए

इस बार  सुधर  जाओ  सारे  सत्ता के  भूखे हैवानों
फिर मत कहना हम तुमको इंसान बनाने क्यूँ आए