Saturday, May 11, 2019

आजकल

वो भी नये ख़यालों का मारा है आजकल
जो ग़ैर था पहले, वो हमारा है  आजकल

वाॅलेट की वो तस्वीर  अब पुरानी बात है
सरेआम फेसबुक पे  नज़ारा है आजकल

ना ख़त रहे,  ना ख़त का इंतज़ार ही रहा
बस चैट दिलबरों का सहारा है आजकल

सेल्फी में एक चेहरा भी सीधा नहीं दिखे
सब टेढ़ी निगाहों का इशारा है आजकल

ब्रेकअप का जश्न झूमके मनाना है चलन
दिल टूटना यूँ सबको गवारा है आजकल

बस एक ही नज़र से वो नज़र पे चढ़ गये
और दूसरी  नज़र से  उतारा है आजकल

दीवानों का अब चाँद से रिश्ता नहीं कोई
सितारों में  तन्हा ही  बेचारा है आजकल

अब रात झूमती है मयक़दों में सारी रात
दिन भी मस्त सोके  गुजारा है आजकल

यूट्यूब  पर  दो चार  वीडियो  चढ़ाके वो
हर किसी  निगाह का  तारा है आजकल

हर दिन  वो चाहता है  जैसे  वीकएंड हो
संडे हो चार दिन का ये नारा है आजकल

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